AMAR UJALA

अगर चूरु की थेपडा घेवर का स्वाद चखना है तो चले आइए, कहीं और नहीं मिलेगा यह स्वाद


चूरू. सर्दी की शुरुआत के साथ ही शहर में थेपडा घेवर बनने लगे हैं. और सुहानी सर्दी में शहर घेवरो की मीठी खुशबू से महक उठता है.आमतौर पर सभी मिठाइयां पूरे देश और प्रदेश में बनती और बिकती है लेकिन चूरू का थेपडा घेवर का अगर आपको स्वाद चखना है तो आपको इसके लिए चूरू ही आना होगा.थेपडा घेवर विक्रेता बताते हैं की ये घेवर चूरू तहसील और इसके कुछ आस पास के इलाके में तो बनता हुआ और बिकता हुआ आपको नजर आ जाएगा, लेकिन चूरू से बाहर आपको ये घेवर नही मिलेगा. चूरू में जैसे-जैसे सर्दी अपने परवान चढ़ती है वैसे-वैसे इस घेवर की बिक्री भी बढ़ जाती है.

महज डेढ़ महीने ही ये घेवर लोगो का स्वाद बढ़ाता है. शहर के कान्हा मिष्ठान भंडार के परमेश्वर लाल सैनी बताते हैं दिसंबर माह से घेवर बनाने का कार्य शुरू करते हैं जो कि मकर संक्रांति तक चलता है.

देशी घी और डालडा दो तरह के बनते हैं
थेपडा घेवर के कारीगर परमेश्वर लाल सैनी बताते हैं कि थेपडा घेवर दो तरह के बनते हैं एक देशी शुद्ध घी का और एक डालडा घी का देशी घी के थेपडा घेवर के दाम डालडा से दुगुने है और उनके यहां दोनो तरह के वह घेवर तैयार करवाते और बेचते हैं. डालडा घी के घेवर के दाम 160 रुपए प्रति किलो है तो देशी घी के थेपडा घेवर के दाम 320 रुपए प्रति किलो है.

बबर घेवर और थेपडा घेवर
घेवर विक्रेता बताते हैं कि दो तरह के घेवर बनाते हैं एक बबर घेवर और दूसरा थेपडा घेवर उन्होंने बताया कि आमतौर पर बबर घेवर आपको प्रदेश के सभी जिलों में बनता और बिकता हुआ नजर आ जायेगा लेकिन थेपडा घेवर सिर्फ चूरू में ही बनता है.

ऐसे बनता है थेपडा घेवर
मिष्ठान भंडार के परमेश्वरलाल सैनी ने बताया कि थेपडा घेवर बनाने के लिए वह रात को ही मैदे का घोल कर छोड़ते हैं और सुबह उसे अच्छी तरह मथते है फिर गैस की आंच पर घी में हाथो से ही घोल को डालते हैं और अच्छे से उसकी सिकाई करते हैं. फिर उसे मीठा करने के लिए चासनी में डालते हैं.

खाने और बाटने के लिए ले जाते हैं लोग
मकर संक्रांति तक मलमास का महीना है जिसे धर्म-कर्म का भी दौर चलता है ऐसे में ना सिर्फ लोग इस थेपडा घेवर को अपने खाने के लिए ले जाते हैं बल्कि बाटने के लिए भी ले जाते हैं.

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FIRST PUBLISHED : December 20, 2022, 18:59 IST


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